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Tuesday, September 13, 2016

हिंदी दिवस क्यों ?

हिंदी दिवस क्यों ? शीर्षक देखकर आप ज़रूर सोचने लगे होंगे   कि  कैसा पागल है ? कैसा हिंदी विरोधी है ? लेकिन साल में केवल एक दिन हिंदी दिवस या एक पखवाड़े को हिंदी पखवाड़े के रूप में मना कर आपको ऐसा नहीं लगता जैसे कनागत मना  लिए हों।  मतलब एक दिन याद करो और भूल जाओ।
हिंदी दिवस हो या किसी की पुण्यतिथि या जयंती ऐसे सभी दिवस मनाने के बाद क्या वो हमें याद रहते हैं ?  बिलकुल नहीं , तो  फिर इसकी बधाई कैसे दी जा सकती है ?
क्या इस देश में कभी अंग्रेजी दिवस मनाया जाता है ? फिर भी देखो कितनी फल-फूल रही है।
तो  अगर सचमुच हिंदी की प्रगति चाहते हैं तो क्यों न ऐसा किया जाए जिससे हमें  दिवस मनाने की ज़रुरत ही न पड़े।
क्या करें 
१- हिंदी का अधिक से अधिक प्रयोग करें
२- हिंदी बोलने में शर्म अनुभव मत करें
३- हिंदी को सरकारी नौकरी में अनिवार्य बनाने के लिए संघर्ष करें
४- सरल हिंदी का प्रयोग करें
५- राजभाषा विभाग  की  मुश्किल हिंदी का विरोध करें
६- हिंदी में मौलिक लेखन को बढ़ावा दिया जाये
७- सभी सरकारी कामकाज हिंदी में हो
८- न्यायपालिका हिंदी और स्थानीय भाषा में काम करे
९- अनुवाद को प्रोत्साहन दिया जाये
१०- हिंदी को उसका सम्मान दिलाने की शुरुवात खुद से करें


Monday, September 12, 2016

"मुश्किल "

"मुश्किल "
जी हाँ,  बहुत  मुश्किल से 
मिलता है  कोई  ऐसा  -
जिसे  देखते ही 
प्यार  हो जाता है, 
आंखों  को  उसके
रूप -रंग  और 
हाव-भाव में  
बस 
प्यार  ही प्यार  
नज़र आता है, 
दिल  कहता है -
कह दे कि  तू ही  है 
जिसे  मैं  जन्म - जन्म  से
ढूँढ रहा हूँ  . 
मगर  ज़बान है कि 
हिलती  ही नहीं, 
होंठ हैं  कि  
खुलते ही नहीं, 
तब महसूस 
होता है  कि -
जितना  मुश्किल है 
प्रेम  का  पाना
उससे  भी  ज्यादा  
मुश्किल है   
प्रेम  का  इजहार  ....
प्रदीप कुमार

Thursday, September 08, 2016

जाने किस बात का क्या क्या मानी निकाला जाए ,
बस यही सोचकर हम उनकी तारीफ़ नहीं करते।  

Wednesday, September 07, 2016

दो गज़  ज़मीन न मिली तो उसका ग़म नहीं ,
तेरे दिल में न रहने का अफ़सोस रह गया  . 

Wednesday, July 17, 2013

भ्रष्टाचार  के आरोप के बाद 
सलमान आलाकमान को सफाई देने गए -
मैंने कुछ नहीं किया ,
ये सब आरोप झूठे हैं .
अच्छा ! आलाकमान चौंकी .
जी - सलमान बोले -
चाहे बेनी से पूछ लो ,
मैं इतने से रुपयों के लिए 
अपना इमान नहीं बिगाड़ सकता .
जहां खरबों के खेल होते हों .
लाखों में पाखानों की मरम्मत होती हो .
वहाँ मैं सिर्फ़ 71 लाख में मुंह काला करूंगा 
तो 2 जी और कोयले से कमाई  इज्ज़त
 ख़ाक में मिल जाएगी .
यह सुनकर आलाकमान को यकीन हो गया 
कि सलमान बेगुनाह है .
 क्योंकि जिस देश के नेताओ  ने चारे और चारकोल 
को पचाकर 2 जी और कोयले की तरफ क़दम बढ़ा दिए हों 
उन्हें अब बैशाखी की क्या ज़रुरत ? 
बस फिर क्या था आलाकमान ने विश्वास 
के साथ फ़ैसला सुना दिया -
बेशक तुम बेगुनाह हो लेकिन 
इन आरोंपों से सबकी बहुत बेइज्जती हुई है 
अब उसकी भरपाई तुम्हें ही करनी होगी ,
जाओ तुम्हें विदेश में भारत की शान 
बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है .
उम्मीद है कोई ओछा काम नहीं करोगे 
और हमारी घोटालों की नीति की 
धाक दुनिया भर में जमाओगे ! 

Monday, October 29, 2012


उम्मीद

भ्रष्टाचार  के आरोप के बाद
सलमान आलाकमान को सफाई देने गए -
मैंने कुछ नहीं किया ,
ये सब आरोप झूठे हैं .
अच्छा ! आलाकमान चौंकी .
जी - सलमान बोले -
चाहे बेनी से पूछ लो ,
मैं इतने से रुपयों के लिए
अपना इमान नहीं बिगाड़ सकता .
जहां खरबों के खेल होते हों .
लाखों में पाखानों की मरम्मत होती हो .
वहाँ मैं सिर्फ़ 71 लाख में मुंह काला करूंगा
तो 2 जी और कोयले से कमाई  इज्ज़त
 ख़ाक में मिल जाएगी .
यह सुनकर आलाकमान को यकीन हो गया
कि सलमान बेगुनाह है .
 क्योंकि जिस देश के नेताओ  ने चारे और चारकोल
को पचाकर 2 जी और कोयले की तरफ क़दम बढ़ा दिए हों
उन्हें अब बैशाखी की क्या ज़रुरत ?
बस फिर क्या था आलाकमान ने विश्वास
के साथ फ़ैसला सुना दिया -
बेशक तुम बेगुनाह हो लेकिन
इन आरोंपों से सबकी बहुत बेइज्जती हुई है
अब उसकी भरपाई तुम्हें ही करनी होगी ,
जाओ तुम्हें विदेश में भारत की शान
बढ़ाने की ज़िम्मेदारी दी जाती है .
उम्मीद है कोई ओछा काम नहीं करोगे
और हमारी घोटालों की नीति की
धाक दुनिया भर में जमाओगे !

Wednesday, October 24, 2012


रावण की मुक्ति 



रावण !
आज दशहरे के बाद भी नहीं जला ,
क्योंकि आज उसे राम ने नहीं .
एक पापी और भ्रष्टचारी ने जलाने के लिए
तीर चलाया तो उसका तीर
रावण तक पहुंचा ही नहीं .
 जब तक बाकी लोग रावण
को जलाने के लिए तीर चढ़ाते ,
रावण बोल उठा - ठहरो !
कई सदियों से तुम हर साल
मुझे जलाते हो ,
लेकिन मैं आज तक नहीं मरा .
और हैरत तो ये है कि तुमने राम
की तरह मेरे बार बार जीने का कारण
भी जानना नहीं चाहा .
यह सुनकर भीड़ को सांप सूंघ गया
मगर फिर सब हिम्मत करके बोले -
किससे पूछें  ?
अब विभीषण भी तो नहीं है .
रावण  बोला - तो अब तक भी तुम वहीं जी रहे हो .
अब कोई विभीषण नहीं आएगा
तुमने राम को भी नहीं जीने दिया .
तो विभीषण किस खेत की मूली है .
लेकिन मुझे तुम पे बहुत दया आ रही है
सदियों से तुम्हारी परेशानी मुझसे सहन नहीं होती
मैं खुद अब बार बार जीने से उकता गया हूँ .
क्योंकि  राम की धरती के आधुनिक रावण
मुझ ज्ञानी को चिढाने लगे हैं
राम तो  हैं नहीं रावण ही मुझे जलाने लगे हैं
फिर मैं कैसे जलूँगा ?
सुनो ! अगर मुझे सचमुच जलाना चाहते हो
तो जिन पापियों और भ्रष्टाचारियों को
मुझे जलाने के लिए बुलाते हो ,
अबकी बार उन्हें जलाओ .
एक बार वो खत्म हो गये
तो रावण भी जल जाएगा और
 मुझे भी  मुक्ति मिल जाएगी .