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Wednesday, May 07, 2008

nai ghazal

छोड़ोगी मुझे मैं भी तुम्हें छोड़ जाऊंगा ,
तोड़ोगी मुझे मैं भी तुम्हें तोड़ जाऊंगा .
खामोशियों कि मौत गंवारा नहीं मुझे ,
शीशा हूँ टूटकर भी खनक छोड़ जाऊंगा .
गूंजेगी फिर वो देर तलक तेरे कान में ,
पल में गिरा तो ऐसी धनक छोड़ जाऊंगा .
बख्शोगी मुझको ग़म तो tadpogi उम्र भर ,
तेरे भी दिल में ऐसी कसक छोड़ जाऊँगा .
आंसू के समंदर में खुद डूबकर भी मैं .
दरिया के रुख को तेरी तरफ मोड़ जाऊंगा .
तुम पल में ढहा दोगी अगर रेत का महल ,
तेरी भी आँख में हलकी सी कुनक छोड़ जाऊंगा .
दिल अपना जला के बना जो दिलजला प्रदीप .
तेरे भी दिल में उसकी तपिश छोड़ जाऊंगा .

1 comment:

Imran Jalandhari said...

बहुत खूब........ बस इतना ही