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Monday, April 20, 2009

उनकी तारीफ़

उनका चेहरा गुलाब जैसा है ,
उनका हुस्न महताब जैसा है .
धूप की क्या उन्हें ज़रुरत है ,
वो तो खुद आफताब जैसा है .
उनसे क्यों कर सवाल मैं पूछूं ,
वो तो खुद ही जवाब जैसा है .
कहाँ तक जफा का ज़िक्र करुँ ,
ये तो सारा समाज ऐसा है .
हाय उनकी मिसाल किस से दूं ,
वो तो खुद लाजवाब जैसा है .
क्या कहूं कि वो फूल कैसा है,
मुझको लगता गुलाब जैसा है.
कैसे उनको बनाया कुदरत ने ,
वो मेरे हसीन खाब जैसा है .
हर तरफ आज उनके चर्चे हैं ,
वो किसी महव- ऐ- खाब जैसा है.
क्या दिखेगा उसके आगे प्रदीप ,
उनका चढ़ता शबाब ऐसा है .

5 comments:

Aapki Smita! said...

pagal ho aap... aapki aur uski kya comparison.. Aap ki speciality kuch aur hai aur unki kuch aur hai... to compare mat karo Har insaan apne mein special hota hai.. sapno mein jeena acha hai, par haqiqat se bhi muh nahi modna chahiye.. sayad mera ishara samajh rahe honge aap...

BrijmohanShrivastava said...

जनाब ,जब अपन शुरू में ही यह कह चुके हैं कि' उनका चेहरा गुलाब जैसा है 'तो फिर बारहवीं लाइन में यह कहने की क्या जरूरत थी कि 'मुझको लगता है गुलाब जैसा है /अरे भैया गुलाब तो है ही फिर लगता है का क्या मतलब

Pradeep Kumar said...

baat to aapki theek hai ? aisaa kahne ki koi khaas zaroorat to nahi thi magar ek to mujhe nayaa shair likhnaa tha aur doosri baat ye ki ye shair kuchh aise hai -
क्या कहूं कि वो फूल कैसा है,
मुझको लगता गुलाब जैसा है.

fir bhi aapka sujhaav sar maathe aaiendaa anavashyak dohraav se bachoonga.
blog par aane ke liye dhanyavaad

BrijmohanShrivastava said...

प्रदीप ,आप ही सही थे ,मुझसे पढने में ज्ल्दवाजी हो गई /यह शब्दों का दोहराव नहीं है /पहली लाइन चेहरे से सम्बंधित है ;और बाद में फूल कैसा है प्रश्न है और मुझको लगता है गुलाब जैसा है उत्तर है /दोनो लाइने अपनी जगह सही है =जल्बाजी में मुझको क्या लगा की रिपीटेशन कर रहे है /जल्दी में कविता विना पड़े ,समझे टिप्पणी नहीं करना चाहिए जो मुझसे हो गई /मेरी त्रुटी अनजाने में है और क्षमा योग्य है /

Renu Sharma said...

prdeep ji ,
aap bahut khoob likhte hain .
ganv ki bat aate hi aapki bechaini bhi dekh li .
shukriya .