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Friday, May 15, 2009

आप और हम

रूबरू आप जब नहीं होते,
उस घड़ी हम भी हम नहीं होते .
कुछ तो वजह होगी ज़रूर,
लब यूं ही बंद नहीं होते .
हौसला गर न हो दिल में ,
तो इरादे बुलंद नहीं होते .
कुर्बत के बाद भी,दिल मिले;
बिन फासले कम नहीं होते.
फूल गर खूबसूरत होता है ,
चाहने वाले भी कम नहीं होते .
जज्बातों को उभरने दो कि ये,
इस तरह से कम नहीं होते .
क्या हुआ गर घना अँधेरा है,
प्रदीप यूं चिराग मद्धम नहीं होते .

2 comments:

abhivyakti said...

bhut hi bhavpurn rachna
maan ko chhu gai

vandana said...

apki jyadatar rachnaye padhi ...sabhi bahut khoob hai ...kosis hai sari padho...