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Tuesday, March 31, 2009

प्रेमिका के लिए

तुम्हें दिल से लगाना चाहता हूँ,
तुम्हें अपना बनाना चाहता हूँ .
अपनी बांहों में भरके तुम्हें .
सारे जग से छुपाना चाहता हूँ
जिस घड़ी तेरे पास न हो कोई ,
मैं तेरे पास आना चाहता हूँ .
आज तक जो नहीं सुन पाया कोई ,
वही नग्मा सुनाना चाहता हूँ .
तमन्ना बसी है जो इस दिल में ,
वो सब तुमको बताना चाहता हूँ.
बहुत सी बातें अनकही हैं ,
वो सब तुमको सुनाना चाहता हूँ .
हुई मुद्दत मुझे आंसू बहाते ,
तेरी कुर्बत में मुस्कुराना चाहता हूँ .
छुपा जो भी प्रदीप के दिल में ,
हाल-ऐ-दिल सब बताना चाहता हूँ .

1 comment:

Smita said...

Kehna to bahut kuch tha hume,
Par hua yun kuch haal apna,
khud ko bhul kar bas aapko yaad karte rahe...